मनुस्मृति का रचना काल: Difference between revisions

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Authored by Prof. Dr. Bhiplav, Chandrakanta Mahavidyalaya, Sikandradrabad, Uttar Pradesh.
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Latest revision as of 14:32, 16 July 2024

भूमिका

परंपरानुसार मनु मूल रूप से वैवस्वत स्वायम्युभुव एवं सावर्णि स्वयं से संबंधित है I मनु अदिति विवस्वत के पुत्र हैं I फलतः वे वैवस्वत हुए  I स्वयं उत्पन्न होने से स्वायम्भुव कहलाए I विवस्वत की स्त्री सवर्णा थी इसलिए उन्हें सावर्णि कहा गया I सृष्टि के मूल पुरुष के रूप में उन्हें प्रजापति माना गया I उन्हें यज्ञ में भाग लिया, वे दैवी रूप में प्रस्तुत हुए १  I दैवी के साथ में कृषि रूप में मनु का उल्लेख है I  विकासकर्ता के रूप में मनु द्वारा अपने पुत्रों में संपत्ति विभाग करने का उल्लेख है  I मनु मनुष्य हैं सदाचार पालन कर्ता के रूप में मनु का उल्लेख है I पुरुरवा, शर्यात, और इच्वाकु के पिता के रूप में उनका वर्णन आता है I महाभारत में उन्हें श्राद्धदेव माना गया है २  I छन्दोग्य उपनिषद के अनुसार अंतिम अंश का दर्शन ब्रह्म के द्वारा कश्यप प्रजापति को हुआ I उनमें मनु को मिला  I

मनुस्मृति का  काल  

मनु ने उसे मानव मात्र में प्रसारित किया  I योग भी भगवान से विवश्वन को उनसे मनु और उनसे  इक्ष्वाकु को प्राप्त हुआ I ३ मनु के सभी उल्लेखों को एकत्र कर देने के बावजूद भी यह नहीं कहा जा सकता कि मनु एक ही है I मनु ने मानव अचार सदाचार एवं विधि के संबंध में नियम प्रस्तुत किए I मनु वचन को भेषज कहा गया I इनसे मानव मात्र का कल्याण संभव है I मनु संहिता की एक परंपरा का ज्ञान निरुक्त से होता है ४ I निरुत्त में स्वायम्भुव मनु के जिस वचन को उत्तराधिकार के संबंध में उद्धृत किया है वह ना तो वर्तमान मनुस्मृति में न हीं उत्तराधिकार से संबंधित मनु के वचनों से प्राप्त होता है I श्राद्ध एवं कर्म का फल प्रारंभ मनु से हुआ  I आपस्तम्ब में इसका उल्लेख है I मनु के निर्देश का उल्लेख है I पुत्रों के समान विभाग के संबंध में मनु प्रमाणित माने गए  I बौधायन ने माना की ऋतुमयी में होने के बाद कन्या का विवाह करने वाला पिता पातकी होता है ,यह संदर्भ मनु का अनुसरण है ५  I

महाभारत में

जिस प्रचेतस मनु का उल्लेख है उसका नाम 14 मनुओं में नहीं आता I वे 10 ऋषियों में आते हैं I ऋषियों की उत्पत्ति मनु से हुई मरीचि, अत्रि ,अंगिरा ,पुलत्स्य ,क्रतु , प्रचेता ,वशिष्ठ ,भृगु  ,श्रृंगी , और नारद ऋषियों के नाम है I मनुस्मृति में सृष्टि रचना का काल परिगणन विशाल है  I उनमें कालचक्र प्रवर्तक मनु है I मनु सृष्टि के मूल पुरुष एवं संरक्षक होते रहे  I

    वर्तमान सृष्टि के लिए मनुस्मृति मनु द्वारा घोषित विधि संगीता है ६ I मेघा तिथि ने मनु नाम के स्थान पर पद बताया है I इस प्रकार की परंपरा चलने से साम्प्रदायिक अविच्छिन्न रहता है I  वर्तमान मनु को अग्नि, केंद्र ,वायु ,आदि देवताओं का रूप माना गया है I उसकी स्मृति वेद पर आधारित है ७ I अतएव मनुष्य विपरीत किसी स्मृति का प्रमाण नहीं है ८ I नियोग की वैदिक विधि का मनु ने घोर विरोध किया और उसे पशु धर्म बताया  I

    उक्त के बावजूद मनु ने योग की विधि का वर्णन किया है ९ Iमणिप्रभा टीका के अनुसार यह कलयुग विषयक है I बृहस्पति का मत है कि मनु ने नियोग का विधान कर स्वयं उसका निषेध किया है I क्योंकि वह युग क्रम में लोगों से संभव नहीं फलतः निषेध में तब आदि की शक्ति हीनता को बृहस्पति ने कारण बताया है I मनुस्मृति ब्राह्मण और उनके शिष्यों को ही पढ़ना चाहिए I मनुस्मृति पढ़ने वाला तथा इसके अनुसार कार्य करने वाला ब्राह्मण मानसिक वाचक और कायिक कर्म दोष में लिप्त नहीं होताI  जो व्यक्ति स्मृति का पाठ करें वही विद्वान शंसित व्रत माना जाता है १० I मनुस्मृति के अनुसार जीवन यापन करने वाला अपने पंक्ति को अपने कुल में उत्पन्न हुए तथा उत्पन्न होने वाले सात पीढ़ियां तक के वंशजों को पवित्र करता है तथा संपूर्ण पृथ्वी को ग्रहण करने योग्य बनाता है I अर्थात पितर भी मुक्त हैं और स्वयं का लौकिक एवं पारलौकिक कल्याण होता है ११  Iतीनों वेदों के अध्ययन के समान मनुस्मृति का अध्ययन है  I मनुस्मृति बुद्धि वर्धक यशोवर्धक आयुर्वर्धक और मोक्ष का साधक है I

    मनुस्मृति के रचना एवं काल का निर्धारण अत्यंत कठिन है I ऋग्वेद के मनु से वर्तमान स्मृति का कोई संबंध नहीं है I मानव धर्म सूत्र एवं मनुस्मृति में भी कोई संबंध नहीं है I साथ ही दोनों में भिन्नता एवं स्पष्ट विरोध है १२ I डॉक्टर कैलेंडर के अनुसार श्राद्धकर्म और मनुस्मृति के एक श्लोक में समानता है I किंतु शव संस्कार के कोई श्लोक सामान नहीं है I ब्रैडक भी तुलनात्मक व्याख्या प्रस्तुत करते हैं I महाभारत में मनु को धर्मशास्त्र मनु प्रचेतक को अर्थशास्त्र राज धर्म एवं अर्थ विद्या का प्रतिस्थापक कहा गया है I कौटिल्य अर्थशास्त्र में वर्णित मनु के विचार का मनुस्मृति से कोई संबंध नहीं है  I वास्तव में वह स्वयंभू मनु से भिन्न अर्थशास्त्र के मनु है I विलक्षणता यह है कि मानव के नाम से प्रस्तुत विचार मनुस्मृति में नहीं है, परंतु मनुस्मृति के विचार कौटिल्य अर्थशास्त्र में उपलब्ध हैं १३ I मनु का साहित्य कला विशेष के है उसमें एवं उदरणों के अंतर में मनु के काल पर प्रकाश डालता है I वे तीन वेद और अथर्ववेद को अर्थर्वागिरस श्रुति के रूप में उद्घृत करते हैं I वे स्वयं केचित् अपरे अन्ये का उदाहरण अरुचि से देते हैं  I स्पष्ट है की मनुस्मृति अपने से पूर्व की परंपरा का खंडन करती है  I

    मनुस्मृति का काल एवं परंपरावादियों द्वारा माने गए काल में कोई संबंध अथवा समन्वय नहीं है I इसके समर्थन में सैकड़ो प्रमाण उपलब्ध हैं  I मनुस्मृति में वेद वेदांग धर्मशास्त्र वेद के लिखित आरण्यक धर्मशास्त्रियों का उल्लेख आख्यान इतिहास और पुराणों के उदाहरण है I मीमांसक निरुत्व धर्म पाठक हेतु का नाम परिषद निर्माण करने वालों में आता है I अग्नि, गौतम, शौनक ,और भृगु के विचारों में शुद्र से विवाह करने वाला ब्राह्मण जाति बहिष्कृत कर दिया जाता है I वैखानस का भी उद्धरण है  I शुद्र में विशिष्ट के मत का उद्धरण आता है  I अवैदिक संप्रदायों या संगठनों का उल्लेख और उसके लिए निषेध प्रस्तुत किया गया है  I स्पष्ट किया इस वेदबाह्य कहा गया है I  

    बूलर ने मनुस्मृति के गंभीर अध्ययन से निष्कर्ष निकाला है कि इसका मुख्य आधार मानव धर्म सूत्र है I जो उपलब्ध नहीं है १५ I परंतु बूलर आगे स्वयं स्वीकार करते हैं कि मानव सूत्र के लेखों के आविष्कार के बाद उसमें मनुस्मृति और मानव सूत्रों के परस्पर संबंध होने के मत में कोई सहायता मिलनी तो दूर रही प्रयुक्त कठिनाइयां और बढ़ गई है I मानव गृहसूत्र एवं मनुस्मृति के सिद्धांतों में अत्यंत मतभेद है वास्तव में बूली ने अपना निष्कर्षअर्थशास्त्र के प्रकाशन के पूर्व प्रस्तुत किया  I वेदांत सूत्र में शंकराचार्य ने मनु का उदाहरण किया है I

    मनु के विचार वृद्दारण्यक उपनिषद में भी प्राप्त होती है I यहाँ मनु को शिस्ट माना गया है I तत्रवार्तिक में कुमारिल ने मनु को गौतम से उच्च स्थान दिया है  I मृच्छकटिक मनु के आदेश पर निर्णय होता है I पांचवी सदी के आसपास वल्लभी आदि शिलालेखों में मनु का उल्लेख है १६ I बृहस्पति ने मनु को वेद के सर्वाधिक निकट पाया I इसका सर्वाधिक प्रमाण है बृहस्पति ने विभिन्न स्थानों पर मनु का उदाहरण दिया है  I साथ ही एक स्थान पर विरोध भी किया है I भृगु का मनु स्मृति से संबंध अज्ञात न था  I अश्वघोष की बज्र सूची में मनु का उदाहरण है I रामायण में मनु का उल्लेख है  I महाभाष्य मनु वचन का उल्लेख करता है I उक्त से यह निष्कर्ष कठिन नहीं की द्वितीय शताब्दी तक के ग्रन्थों में मनुस्मृति के उदाहरण प्राप्त होते हैं  I

    अयंगर मनुस्मृति को कौटिल्य अर्थशास्त्र से पुरानी मानते हैं १७ I उनका तर्क है की मनुस्मृति एवं अर्थशास्त्र में मतैक्य है  I अर्थशास्त्र में मनु के मत को ही प्रमाणित किया गया है  I दोनों में मतभेद नगण्य है I जायसवाल अर्थशास्त्र का चंद्रगुप्त कालीन रचना मानते हैं I मनुस्मृति का समय कौटिल्य के लगभग 150 वर्ष बाद स्थिर होता है  I मनुस्मृति में अनेक स्थानों पर कौटिल्य के विरुद्ध मत का प्रतिपादन है I जबकि याज्ञवलक्य कौटिल्य के मत को ज्यों का त्यो स्वीकार करते हैं  I मैक्सडकर ते मनुस्मृति का काल 600 ईसा पूर्व में स्थिर किया १८ I उसका तर्क है की मनुस्मृति में दक्षिण भारत का उल्लेख नहीं है 500 ईसा पूर्व में ही वह भारत द्वारा हस्तगत कर लिया था  I शिव आदि पौराणिक देवों की उपासना का कोई उल्लेख नहीं है  I

निष्कर्ष   

उक्त विश्लेषण से निष्कर्ष प्राप्त होता है कि मनु के काल निर्धारण पर विद्वानों में मतैक्य  नहीं है लेकिन मनुस्मृति की वर्तमान स्वरूप द्वितीय शताब्दी ईसा पूर्व तक का रहा हो सकता है I इस पर अधिकतर विद्वान का मत एक  हैं  I उस काल में सामाजिक राजनीतिक एवं धार्मिक स्थिति का प्रभाव मनुस्मृति पर पड़ा  I वर्तमान मनुस्मृति परिवर्तित एवं संशोधित है I इस पर देशकाल एवं परिस्थितियों का भरपूर प्रभाव है  I

संदर्भ ग्रंथ

१-मैं ० ब्राह्मणोपनिषद -5.1

२-महाभारत- 1.3.121.29

३-भगवत गीता- 4.1 2

४- ताण्ड्य ब्राह्मण -2.16-17

५- बौ ० 4.1.13 तुलनीय मनु स्मृति- 9.90-91

६-मत्स्यपुराण अध्याय- 145

७-मनुस्मृति 2.7 एवं मनुस्मृति -7.42 1.2.125

८-बृहस्पतिस्मृति - गाय -85- संसकार-13

९-मनुस्मृति- 9.59-62

१०-मनुस्मृति- 1.104

११-मनुस्मृति- 1.105

१२-मनुस्मृति -1.18 पर मेघा तिथि दान खंड ,पृष्ठ ,58- 4 संस्कार- मयूख -पृष्ठ दो- में उद्रत भविष्य पुराण का वचन

१३-देखें मानव गृ सू -2.12- 12 -मनुस्मृति 3.1

१४-मनुस्मृति -10.80-82

१५- काणे ,हिस्ट्री ऑफ धर्मशास्त्र, वॉल्यूम, 1 पेज 5

१६-वेदांत सूत्र -3.1.14

१७-सेन ए के -स्टडी इन हिंदू पॉलीटिकल थॉट -कोलकाता -1922- पेज -129

१८-मैक्सडंकर ने मनुस्मृति का काल 600 ईसा पूर्व में स्थिर किया I उसका तर्क है की मनुस्मृति में दक्षिण भारत का उल्लेख नहीं है I 500 ईसा पूर्व में ही वह भारत द्वारा हस्तगत कर लिया गया था I शिव आदि पौराणिक देवी की उपासना का कोई उल्लेख नहीं हI महाभारत और रामायण के किसी पात्र का नाम इसमें नहीं है I

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