मनुस्मृति में मंत्रिपरिषद

From enIKSwiki
Revision as of 16:09, 16 July 2024 by Sriram (talk | contribs) (Created page with " '''मंत्रिपरिषद की नियुक्ति'''   प्रशासन के अध्यक्ष के रूप में राजा सर्वप्रथम अपने मन अनुकूल मंत्रिपरिषद गठित करता है I  बिना मंत्री परिषद के राजा राज्य का विशाल कार्य नहीं संपन्न कर स...")
(diff) ← Older revision | Latest revision (diff) | Newer revision → (diff)
Jump to navigation Jump to search

मंत्रिपरिषद की नियुक्ति  

प्रशासन के अध्यक्ष के रूप में राजा सर्वप्रथम अपने मन अनुकूल मंत्रिपरिषद गठित करता है I  बिना मंत्री परिषद के राजा राज्य का विशाल कार्य नहीं संपन्न कर सकता I  इस संबंध में धर्मशास्त्र, अर्थशास्त्र ,एवं राजनीति संबंधी सभी ग्रंथ एकमत हैं I स्वयं ही प्रशासन का संपूर्ण कार्य संपन्न करने वाले राजा को मनु मूर्ख मानते हैं १ I

मनु के मत में एक व्यक्ति के लिए सहज कार्य भी कठिन है I अतः राजा का राज्य के बड़े एन अन उत्तरदाईपूर्ण कार्यों के संपादन में सहायकों की  सहजआवश्यकता होती है २ I मनु का यह वचन महाभारत में ज्यों का त्यों उद्धृत है ३ I मनुस्मृति में राजा को अपने सहायकों के रूप में मंत्रियों या सचिवों की नियुक्ति का एकमात्र अधिकार है ४ I मनुस्मृति में ऐसी कोई केंद्रीय प्रतिनिधि संस्था नहीं है जिसके प्रति मंत्री पूर्ण रूप से उत्तरदाई होते I मंत्री प्रत्यक्ष रूप से राजा के प्रति उत्तरदाई हैं एवं अप्रत्यक्ष रूप से जनमत के प्रति मंत्रियों को किसी वैधानिक बल का सहारा नहीं है ५ I

क्रियान्वयन की शक्ति    

मनु ने क्रियान्वयन की अंतिम शक्ति राजा को दी है ६ I मनु सिद्धांत व व्यवहार दोनों में शक्ति का केंद्र राजा को मानते हैं I मंत्रियों की स्थिति यह है कि वह एक तरफ राजा को सलाह देते हैं और दूसरी तरफ उनके निर्देशों का पालन प्रशासनिक आवश्यकतानुसार करते हैं I मनु राजा के लिए अलग से  किसी सलाहकार संस्था की आवश्यकता नहीं स्पष्ट की I विद्वान विश्वासी ब्राह्मण मंत्री की मनु ने तो यहां तक माना है कि उसके ऊपर मुख्यतः संपूर्ण राज्य के कार्यों का भार छोड़कर स्वयं कुछ निश्चित कार्य का संपादन करें ७ I मनुस्मृति में राजा को मंत्रियों के अलावा अन्य प्रशासनिक अधिकारियों की नियुक्ति का अधिकार है ८ I इस संबंध में मनु के टीकाकारों में गहरा विरोधाभास है I कुल्लूक अन्य प्रशासनिक व्यक्तियों को कर्म सचिव के रूप में उद्धघृत करते हैं ९ I भुल्लर इन्हें सचिव मानते हैं १० I

विभागों का वितरण       

वास्तव में मनु प्रशासन के सारे तत्वों को इस प्रकार स्पष्ट करते हैं कि राजा प्रशासन का सर्वोच्च अधिकारी है I मंत्री एवं उसके पश्चात सचिव राजा की सहायता में होता हैI  सचिवों के विभागों का वितरण राजा करता है I मनु का मत है की नियुक्ति सचिवों से शूरवीर, उत्साही ,कुलक्रमागत, शुद्ध चित्त वाले, को कर संग्रह करने में एक भिरू मनोवृति वाले को महल के रक्षार्थ राजा नियुक्त करें ११ I मनु ने विभागों के बंटवारे में मनमानी नहीं योग्यता मूलक आधार स्वीकार किया है I राज्य के अन्य विभाग के कार्यों के संपादन हेतु राजा जितने चाहे सचिवों की नियुक्ति कर सकता है १२ I प्रशासन के सुशासन के लिए किसी प्रकार का आरक्षण नहीं  I  योग्यता ,कर्मठता ,ज्ञान ,संवेदनशीलता, आधार होना चाहिए I

परराष्ट्र संबंध के निर्धारण  

परराष्ट्र संबंध के निर्धारण में दूतो का प्रमुख स्थान है I दूतों की नियुक्ति राजा द्वारा होती है I विशेष अवसर पर विशेष दूत की नियुक्ति का अधिकार राजा को है १३ I मनु के मत में राजा सब शास्त्रों में कुशल संकेत आकार एवं चेष्टा से मन का भाव जानने वाला ,पवित्र चरित्र वाले ,चतुर व्यक्तियों को दूत नियुक्त करें १४ I मनु ने स्वीकार किया है कि दूत राजा के लिए अति आवश्यक है I  दूतों की नियुक्ति करके राजा दूसरे देशों से सन्धियाँ करने एवं विदेशी राज्यों के नियुक्त दूतों का स्वागत करने का अधिकार प्राप्त कर लेता है I दूतों की नियुक्ति में भी योग्यता ही एकमात्र आधार होना चाहिए I अगडा पिछड़ा या जाति ,धर्म, क्षेत्र, आधार नहीं हो सकता I मनु ने विभागों के कार्य संचालन में राजा को विभिन्न अध्यक्षों की नियुक्ति का अधिकार दिया है I उनका मत है कि राजा सैनिक आर्थिक सांस्कृतिक एवं वैदिक विभागों के कार्य संचालन हेतु विभिन्न प्रकार के अध्यक्षों की नियुक्ति करें I यह अध्यक्ष अपने विभागों के कार्यों का निरीक्षण करते हैं १५ I कौटिल्य ने अध्यक्ष प्रचार अधिकरण में अध्यक्षों की लंबी सूची प्रस्तुत की है १६ I मनु स्मृति में अध्यक्षों की सूची नहीं है उनके संकेत का विस्तार महाभारत में प्राप्त होता है १७ 

मंत्रिपरिषद के कार्य    

मनु ग्राम को प्रशासन की सबसे छोटी इकाई मानते हैं I ग्राम से लेकर केंद्र तक का प्रशासन राजा के प्रत्यक्ष नियंत्रण में है I ग्राम अधिकारी राजा के वेतन भोगी कर्मचारी हैं I ग्राम प्रशासन में राजा को दो या तीन या 500 ग्रामों के मध्य राज्य रक्षा हेतु रक्षक समूह की नियुक्ति एवं ग्राम शासन के संचालन हेतु ग्राम अधिपति की नियुक्ति करने का अधिकार है I

नगर व्यवस्था के लिए मनु राजा को विभिन्न अधिकारियों एवं कर्मचारियों की नियुक्ति का अधिकार देता है I स्पष्ट है कि मनु नगरों तथा ग्राम अधिकारियों को राजकीय कर्मचारी मानते हैं I मनु एक ऐसे उच्च अधिकारी की नियुक्ति करने का अधिकार राजा को प्रदान करते हैं जो प्रत्येक नगर में आतंक उत्पन्न करने वाले नक्षत्र में शुक्र आदि ग्रहों के समान तेजस्वी और सब विषयों की देखभाल करता है १८  I  नगर में नियुक्त यह उच्च अधिकारी ग्राम अधिपति आदि अधिकारियों का निरीक्षण करता है और दूतों के माध्यम से उनके कार्य बर्ताव आदि व्यवहार की जानकारी प्राप्त कर राजा को इसकी सूचना देता है I

निष्कर्ष   

मनु ग्राम एवं नगर में सुशासन की स्थापना भय  एवं सुशासन के समन्वय से करते हैं  I मनुस्मृति में राज्य के आध्यात्मिक कल्याण एवं धार्मिक कार्यों के संचालन हेतु राजा पुरोहित की नियुक्ति करता है १९ I पुरोहित की राजनीतिक स्थिति पर मनु मौन है I मनुस्मृति में पुरोहित की नियुक्ति मात्र धार्मिक कार्य के संपादन हेतु होती है I पुरोहित पर राज नियंत्रण मनुष्य स्वीकार करते हैं I उनका मत है कि यदि पुरोहित राज्य एवं समाज के विपरीत कार्य करें तो उनके अमात्यों एवं न्यायाधीशों के समान दंडित करने का अधिकार है २० I पुरोहित के संदर्भ में मनु की धारणा लौकिक है I वह अन्य कर्मचारियों की भांति राजा का वेतन भोगी कर्मचारी है I

संदर्भित ग्रंथ

१-मनुस्मृति -7.30

२-मनुस्मृति -7.5 5

३-महाभारत शांतिपर्व -80.1

४-मनुस्मृति -7.54

५-अलतेकर -प्राचीन भारतीय शासन पद्धति –पृष्ठ- 133

६-मनुस्मृति -7.5

७-मनुस्मृति -7.58-59

८-मनुस्मृति- 7.60

९-मनुस्मृति -7.60 पर कुल्लूक भट्ट

१०-भुल्लर लॉ ऑफ़ मनु –पेज- 225

११-मनुस्मृति -7.60

१२-मनुस्मृति- 7.61

१३-मनुस्मृति -7.63

१४-मनुस्मृति -7.64

१५-मनुस्मृति -7.81

१६-कौटिल्य अर्थशास्त्र- 2.15 16,17,18,21,26,27

१७-महाभारत शांति पर्व -अध्याय -80,82,83,85,118, 119

१८-मनुस्मृति -7.12

१९-मनुस्मृति -7.78

२०-मनुस्मृति -8.335

Authored by Prof. Dr. Bhiplav, Chandrakanta Mahavidyalaya, Sikandradrabad, Uttar Pradesh.

Published by,